विधेयक संसद के दोनों सदनों में पेश होता है, उस पर बहस होती है और वोट पड़ते हैं।
समितियां इसका अध्ययन कर बदलाव सुझा सकती हैं। राष्ट्राध्यक्ष के दस्तख़त के बाद यह क़ानून बनता है।
यह क्यों ज़रूरी है
- हर सदन में विधेयक तीन बार पढ़ा जाता है।
- समितियां इसका विस्तार से अध्ययन कर सकती हैं।
- राष्ट्राध्यक्ष के दस्तख़त के बाद यह क़ानून बनता है।
यह डेमो ख़बर है: इसमें हर व्यक्ति, दल, जगह और आंकड़ा काल्पनिक है।






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